जीवन के कई रूप, कभी छाँव कभी धूप
मुझे माँ ने ये समझाया; मेरी धूप किसी की छाया;
दुःख और सुख दोनों ही अपने; दुःख बिन कौन देखेगा सपने?
पर माँ ! ये सब कहने की बातें; हमेशा दुखेंगे पथ के कांटे
तब बस कोई साथ रहे तो, मैं नहीं कोसूँगी दुःख को
मुझे माँ ने ये समझाया; मेरी धूप किसी की छाया;
दुःख और सुख दोनों ही अपने; दुःख बिन कौन देखेगा सपने?
पर माँ ! ये सब कहने की बातें; हमेशा दुखेंगे पथ के कांटे
तब बस कोई साथ रहे तो, मैं नहीं कोसूँगी दुःख को
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